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हिमाचल प्रदेश: सोलन की बेटी बलजीत कौर को मिलेगा तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड

बलजीत कौर को तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड से किया जाएगा सम्मानित

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू प्रदान करेंगी सम्मान, सोलन से पूरे हिमाचल में खुशी की लहर

पुमोरी पर तिरंगा फहराने वाली पहली भारतीय महिला समेत कई ऐतिहासिक उपलब्धियां उनके नाम


शिमला/सोलन। हिमाचल प्रदेश की बेटी और सोलन जिले की रहने वाली प्रोफेशनल एक्सट्रीम एथलीट एवं पर्वतारोही बलजीत कौर को देश के प्रतिष्ठित तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। साहसिक खेलों और पर्वतारोहण के क्षेत्र में उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगी। बलजीत कौर के इस राष्ट्रीय सम्मान की खबर सामने आने के बाद सोलन से लेकर पूरे हिमाचल प्रदेश में खुशी का माहौल है।

बलजीत कौर की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने एक साधारण ग्रामीण परिवार से निकलकर दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वत अभियानों में अपनी अलग पहचान बनाई। सोलन जिले की कंडाघाट तहसील के एक छोटे से गांव से निकलने वाली बलजीत ने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद पर्वतारोहण को अपना जुनून बनाया और लगातार नए मुकाम हासिल किए।

बस चालक पिता की बेटी ने दुनिया की ऊंची चोटियों पर लहराया तिरंगा

बलजीत कौर के पिता अमरीक सिंह एचआरटीसी में बस चालक हैं, जबकि उनकी मां शांति देवी गृहिणी हैं। ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी बलजीत बचपन से ही अपने तीन भाई-बहनों के साथ मां का खेतीबाड़ी के काम में हाथ बंटाती थीं। सामान्य परिवार और गांव के साधारण जीवन से निकलकर उन्होंने जिस तरह पर्वतारोहण की दुनिया में अपना नाम बनाया, वह युवाओं के लिए प्रेरणा की कहानी है।

बलजीत की उपलब्धियों ने न केवल उनके परिवार और गांव को गौरवान्वित किया, बल्कि हिमाचल प्रदेश के पर्वतारोहण इतिहास में भी उनका नाम मजबूती से दर्ज किया है।

माउंट पुमोरी पर तिरंगा फहराकर रचा इतिहास

बलजीत कौर ने 12 मई 2021 को नेपाल की 7,161 मीटर ऊंची माउंट पुमोरी चोटी पर तिरंगा फहराया था। इस उपलब्धि के साथ वह पुमोरी पर तिरंगा फहराने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।

इसी वर्ष उन्होंने 8,167 मीटर ऊंची माउंट धौलागिरी को भी फतह किया। दुनिया की ऊंची और चुनौतीपूर्ण पर्वत चोटियों पर लगातार सफल अभियान पूरा करना उनकी शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता और साहस का प्रमाण माना जाता है।

एवरेस्ट, ल्होत्से और मकालू पर भी हासिल की कामयाबी

बलजीत कौर ने माउंट एवरेस्ट, ल्होत्से और मकालू जैसी दुनिया की कठिन पर्वत चोटियों पर भी सफलतापूर्वक चढ़ाई की। उन्होंने इन ऊंची चोटियों को 7 दिन, 2 घंटे और 8 मिनट में फतह कर अपनी असाधारण पर्वतारोहण क्षमता का परिचय दिया।

इसके अलावा बलजीत ने एवरेस्ट और ल्होत्से पर 25 घंटे 20 मिनट में चढ़ाई पूरी की। इस उपलब्धि के साथ वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।

उनकी ये उपलब्धियां केवल व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं हैं, बल्कि हिमाचल के उन युवाओं के लिए भी बड़ी प्रेरणा हैं, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद साहसिक खेलों और पर्वतारोहण में करियर बनाने का सपना देखते हैं।

संघर्ष से शिखर तक पहुंचने की कहानी

बलजीत कौर की कहानी यह बताती है कि बड़े सपने देखने के लिए बड़े शहर या सुविधाओं से संपन्न परिवार जरूरी नहीं होता। कंडाघाट के छोटे से गांव से शुरू हुआ उनका सफर दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटियों तक पहुंचा। खेतों में परिवार का हाथ बंटाने वाली एक ग्रामीण बेटी ने अपने जुनून और मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण के क्षेत्र में भारत का नाम रोशन किया।

अब जब उन्हें तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा, तो यह उपलब्धि उनके व्यक्तिगत सफर में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ने जा रही है। राष्ट्रपति के हाथों मिलने वाला यह सम्मान उनके साहस, उपलब्धियों और पर्वतारोहण के प्रति समर्पण की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान है।

सोलन से हिमाचल तक जश्न का माहौल

बलजीत कौर को राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुने जाने से सोलन जिले में विशेष उत्साह है। उनके गांव और परिवार के लिए यह गौरव का क्षण है। वहीं, पूरे हिमाचल के लिए भी यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य ने एक बार फिर साहसिक खेलों के क्षेत्र में देश को एक प्रेरणादायक नाम दिया है।

बलजीत कौर की उपलब्धियां यह संदेश देती हैं कि संघर्ष, अनुशासन, हौसले और निरंतर मेहनत के दम पर पहाड़ों की सबसे कठिन चोटियों को भी पार किया जा सकता है। अब तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड के जरिए देश उनके इसी साहस और योगदान को सम्मानित करने जा रहा है।